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Poem on Corona Virus- एक कदम शाकाहार जीवन की और


कोरोना वायरस कहर बन कर बरसा है 
पूरी दुनिया में आज इसकी चर्चा है 
वैज्ञानिक ढूंढ रहे इसका इलाज़ है 
कितने ही लोग हो चुके इसके शिकार है। 

कोरोना वायरस घूम रहा खुले आम है 
हर देश में खेल रहा छुपा छुपी का खेल है 
सांप और चमगादड़ का रोग है 
फिर क्यों इंसानो की बस्ती में मचा इसका शोर है। 

सन्देश फैला हर और -----
"यात्रा करते वक़्त मास्क पहने 
 जुकाम और सर्दी से पीड़ित व्यक्ति का तुरंत इलाज़ कराये 
 सांप और पक्षियों का सेवन न करे 
 किसी व्यक्ति से हाथ मिलाने के बाद बिना हाथ धोये अपने आँखों को न   छुए।"

हम समझ कर भी क्यों अनजान है 
क्यों करते बार बार अपनी जिंदगी से खिलवाड़ है 
पशु को मारकर खाते उनके जबड़े है 
तभी तो उनकी बीमारी बनी हम इंसानो का कल्चर है। 

एक आदमी सूअर खाता है 
बदले में स्वाइन फ्लू का तोहफ़ा हमे दे जाता है 
प्रकति से करता जब जब इंसान छेड़छाड़ है 
प्रकति दिखाती अपना विकराल रूप है। 

इसलिए कहती हु -----
मासाहार खाना छोड़ दो 
पशु को अपना आहार बनाना छोड़ दो 
इन्हे भी खुल कर जीने दो आसमान में, 
इनकी रूह से इनके प्राण निकालना छोड़ दो। 

एक कदम शाकाहार जीवन की और 
एक कदम प्रकति की सुंदरता की और 
एक कदम गुहार लगाती नन्ही जिंदगी की और 
एक कदम तड़पता हुआ गुलज़ार की और 
एक कदम विश्व शांति की और 
एक कदम पनपते हुए रोगो की और 
एक कदम खुशियों की और 
एक कदम सुरक्षित वातावरण की और 
एक कदम आपकी सुरक्षा की और 
एक कदम परिवार की सुरक्षा की और 
एक कदम देश की सुरक्षा की और 
एक कदम विश्व की सुरक्षा की और। 

"आओ हाथ से हाथ मिलाये 
 शाकाहार जीवन का पुष्प खिलाये।"
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