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Jain Religious Beliefs in Tough Situation(Epidemic)

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Jain Religious Beliefs in Tough Situation(Epidemic)
धर्म को धारण कर ले मानव
पता नही जीवन कब तक है
पलक झपकती है हँसी
पता नही खुशी का आवरण कब तक है।

आज जहा कोरोना अपने पंख फैला रहा है, दहसत और भय का आलम सजा रहा है, हर रोज़ कितने घरों के चिराग जला रहा है, और वो निरंतर फैले जा रहा है। हर कोई आज सर्तक है, सजग है, अपने अपने घरों में कैद है पर आज की स्थिति देखे तो हमे पता भी नही चल पाता हमारे ही बीच कोई कोरोना नामक बीमारी से संक्रमित तो नही है। अगर कोई हो जाये फिर तो एम्बुलेंस ही गाड़िया ही दिखती है।

हम खुद को भाग्यशाली कह सकते है जो अभी इस बीमारी की चपेट में नही आये है। पर क्या हम डरे हुए तो नही है, क्या हमे अंदर ही अंदर चिंता नही खाए जा रही है। मरना कोई भी नही चाहता है, सब जीना चाहते है, क्योंकि  ऐसे मरना जब हमारी अरथी को कोई कंधा भी नही दे पाए, यह हमें भी गवारा नही होगा।

बारह भावना की वो गाथा जो मुझे स्मरण हो आयी है--

दल बल देवी देवता, मात पिता परिवार
मरती बिरिया जीव को कोई न राखनहार।

वास्तव में आज यह पंक्ति चरितार्थ हो रही है, इतना बड़ा परिवार फिर भी पहले आइसोलेश, ठीक हो गए तो आपकी किस्मत, अगर तबियत बिगड़ी तो मौत खड़ी सामने है। कंधा तो क्या कोई पास आके पूछने वाला भी नही है।

यही जिंदगी की सच्चाई है, इंसान जब तक ही अच्छा लगता है जब तक वो ठीक है। जैसे ही कोई रोग उसे हो जाये तो वो ही घरवाले जो तुम्हारे नाम लेते लेते नही थकते थे आज तुम्हे किनारा करने में एक पल भी नही लगाते है। यही दुनिया का दस्तूर है, मतलब के पीछे भाग रहा संसार है।

आप अकेले अवतरे, मरे अकेला होए
कबहु या जीव को साथी सगा न कोय।

अच्छा जब वक़्त इम्तिहान ले रहा हो, परिस्थिति बद्तर होने लगे, तब हमक्या कर रहे है, हम न घर पे बैठे खाना का स्वाद ले रहे है, Item पे Item बना के आनंद ले रहे है। कही जगह औरतो ने तो घर मे अब दीवाली की सफाई चालू कर दी।

पर

क्या हम सही रास्ते पे चल रहे है । हम पूरे दिन T.V चालू कर के अपना time pass कर रहे है, मोबाइल पे दिन भर लगे हुए है तो क्या हम परिस्थिति का सही जायज़ा ले रहे है।

इस वक़्त जब महामारी फैल रही है तो जरूरत है आज लोगो को धर्म करने की, भगवान को याद करने की, सामयिक करने की, नवकार मंत्र की माला रोज़ जपने की, बारह भावना, मेरी भावना सुनने की।

हर रोग का इलाज जैन धर्म मे निहित है। नवकार मंत्र ही हर लेता सारा कष्ट है। YouTube पे मेरी भावना, बारह भावना आसानी से मिल जाती है। आज जरूरत है धर्म को अपनाने की, धर्म को जीवन मे स्थान देने की।

धर्म ही है जो आज बचाने वाला है
कठिन परिस्थिति में साथ निभाने वाला है
घर वाले भी साथ छोड़ देते है इस समय मे
धर्म ही है जो भवसागर से पार कराने वाला है।

इसलिए मानव विचार कर, भय से बाहर निकलकर समय का सदुपयोग करो। धार्मिक कार्य करते रहो और इस विपरीत घड़ी में धर्म का साथ न छोड़े। अभी डरने का वक़्त नही है बल्कि घर मे कैद होकर मन की खिड़किया खोलने का वक़्त आया है,इस मुसीबत की घड़ी में घर मे रहकर सिर्फ धर्म करने का वक़्त आया है।
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