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Poem on Holi in hindi




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Poem on Holi in hindi

निकली है टोली रंग लगाने को
खुशियों की महक फैलाने को
बुराई पर अच्छाई की जीत मनाने को
दुश्मन को भी प्यार से गले लगाने को।

निकली है टोली रंग लगाने को
हिरणकश्यप के अहं पर लगाम लगाने को
असुरो को नाश कर खुशिया फैलाने को
प्रह्लाद को चादर से ढक होलिका को जलाने को।

निकली है टोली रंग लगाने को
प्रह्लाद की आस्था पर सर झुकाने को
हरि व्यापक है यह बताने को
अच्छाई के मार्ग पर हमेशा प्रशस्त रहने को।

निकली है टोली रंग लगाने को
होलिका दहन कर बुराई मिटाने को
चना, गेहू की बाली उसमे चढ़ाने को
फिर खेतो की फसल काटने को।

निकली है टोली रंग लगाने को
होलिका दहन कर वातावरण से बीमारी मिटाने को
चेचक, खसरा इत्यादि रोगों को हटाने को
अग्नि दहन कर गर्मी ऋतु का स्वागत करने को।

निकली है टोली रंग लगाने को
वातावरण में नया उल्लास भरने को
पिचकारी में खुशियों को भरने को
होली के त्योहार पर संसार को नए रंगों से भरने को।
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