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Poem on Tree in Hindi

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Poem on Tree in Hindi

उसने  कहा 👨‍🎤वो खड़ा है
मैंने पूछा🤷‍♂ कौन खड़ा है
उसने कहा जिसके पेर🎋 बहुत लंबे है
                और 
जो तन🌴 के हमेशा खड़ा रहता है।

मैंने फिर पूछा किस संदर्भ में कह रहे हो
और किसकी व्याख्या कर रहे हो
उसने कहा वो ही जिसके पेर मटमैले🌴 है
                 और
वो जिसने हरे🌿 परिधान पहने है।

उसने आगे कहा---
न कोई रंग है ना ही कोई रूप है
पता नही क्या 🔓उसका अभिरूप है
हर गली नुक्कड़ पे तन के खड़ा है
आखिर क्या उसका स्वरूप है।

तभी उस तने से आवाज़ आयी----
हरी हरी🌿 पत्तिया मेरी, हरा मेरा रूप है🌲
हरी हरी सब्जियां🍐, हरे हरे अमरूद है🍐🍈
प्रकाश🌞 की क्रिया मुझसे, जीवन मुझसे ही है
ओषधि हु में🎍 यह संसार मुझसे ही है।🌏

एक पल भी रूठ जाऊ तो सृष्ठि में मचे हाहाकार है
जीवन की गद्दी का में ही पेट्रोल पंप हु
मेरी विशेषताए इतनी प्रकति का में करू श्रृंगार है🌹🌷🌸
जड़ होकर भी मुझमें चेतना का एहसास है।☔

(Amazon forest)
आज में किसी कोने में जल 🔥रहा हु
मेरा अस्तित्व मिट रहा है
पर तुमपे भी दिख रहा 🐴इसका असर है
निरंतर बढ़ रहा ताप है☀
नयी समस्या से ग्रसित हो रहा जीवन है
कितने ही लोग बेघर हो चुके है
हर तरफ मची ⛄एक हाहाकार है 
ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रहा जलस्तर है 
तो खत्म हो रहा तुम्हारी गद्दी का पेट्रोल है ।

इसलिए कहता हूं -----------
मुझे जीवन 🌽का वरदान दो
अपने अस्तित्व को मत नीलाम करो 
वरना आने वाली 🙅‍♂पीढ़ी तुम्हे ही दोषी ठहरायेगी
क्योंकि तुमने ही किया मुझसे खिलवाड़ है ।🌱
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