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Poem on Environment in Hindi

Poem on Environment in Hindi, Poem on Nature in Hindi
Poem on Environment in Hindi
Environment Poem
सूरज की पहली किरण शिखर पे रोशनी का आरोहण
रंग बिखरे खुशियो के नदियो का हो रहा सुन्दर संगम
हर तरफ सुनहरी धुप और हरयाली का समागम
समेट के किरणों को चंदा का हो रहा आगमन
विचलित हो मानव ने किया पर्यावरण पे प्रहार
अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए किया पर्यावरण का तिरस्कार
बेठा वो महलो में आपदाए हो रही हर और
भूकंप बाढ़ ज्वार का मिला हमें कीमती उपहार
दूषित हो रहा पर्यावरण हो रहा ओजोन परत का श्ररण
किसपे करे दोषारोपण स्वार्थी हो रहा संसार
खुद से ऊपर उठे करे दुनिया का श्रृंगार
तभी पर्यावरण की बाहो में हरयाली करेगी विराम।
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