plus Moral Story in Hindi-इंसानियत का मंज़र ~ NR SECRET DIARY

Moral Story in Hindi-इंसानियत का मंज़र

Moral Story in Hindi , Inspirational Story in Hindi
Moral Story in Hindi 

कहते है हर रात के बाद सवेरा होता है पर जब रात किसी शख्सियत का इंतज़ार करते हुए राहो पे खड़ी होती है तब कोई बेहाल होता है तब सवेरा को भी निकलते हुए देर हो जाती है तब इंसानियत का भी इम्तहान होता है।

आज की कहानी एक तीस वर्षीय पंकज नाम के लड़के के इर्द गिर्द घूमती है। पंकज रोज की तरह आज भी ९ बजे ऑफिस के लिए निकल चूका था। ऑफिस पहुँचकर वो अपने काम में तलीन हो गया। उसका अपना लकड़ी का बहुत बड़ा कारखाना था। कुछ शाम के छह बजे थे, उसके दोस्त का फ़ोन आया और मूवी चलने को कहा। पंकज चलने को तैयार हो गया और कुछ ७. ३० बजे वो ऑफिस से निकल गया। पंकज ने फिर माँ को इत्तला करने के लिए फ़ोन किया की आज वो लेट आएगा और खाना भी खा के आएगा। 

वो हाइवे पे गाड़ी चला रहा था। तभी अचानक एक ट्रक पता नहीं कहा से आकर उसके अंदर घुस गयी। उसकी बाइक को जैसे गायब ही हो गयी और वो एक तरफ जा कर गिर पड़ा। उसके पलकों के ऊपर से खून बहा जा रहा था और उसके हाथ पैर पर भी बहुत चोटे आयी थी। वो बेझान पत्ते के भाति एकदम शांत हो गया था। 

इधर उसका दोस्त उमंग उसे फ़ोन कर रहा था पर जब उसने फ़ोन नहीं उठाया तो तो वो भी हाइवे की तरफ उसको देखते हुए निकल पड़ा। इधर एक सज्जन पुरुष उसकी तरफ आये और उसे अपनी गोद में उठा गद्दी में बैठाया और उसके पलकों पे कस के रुमाल बांधा और सीधा अस्पताल ले आया। फिर डॉक्टर उसे सीधे इमरजेंसी वार्ड में ले गए और नर्स ने उसके जेब से बजते हुए फ़ोन को उसे लालदास सेठ को थमाया और उन्होंने उमंग का फ़ोन उठा उसे हादसा के बारे में इत्तला किया। उमंग ने उसके घरवालों को भी फ़ोन किया और वो सीधा अस्पताल पहुंच गया। 

O.T की लाइट बंद हो गयी थी और डॉक्टर ने लालदास सेठ की पीठ थपथपाई और कहा अब वो लड़का खतरे से बाहर है।  इतनी देर में उसका दोस्त और उसके घरवाले भी पहुंच गए थे। यह सुनकर सबने शांति की सांस ली। 

पंकज को अब धीरे धीरे होश आ रहा था। उसके पास उसका मित्र उमंग बैठा था। उसका पहला सवाल मुझे अस्पताल कौन लेकर आया और मुझे वो याद क्यों नहीं है। गिरने के बाद क्या हुआ था और में यहाँ कैसे आया, मुझे क्यों याद नहीं है। वो १५-२० का वक़्त उसके मानसपटल से जैसे गायब ही हो गया था। 

तभी उसके चाचा ने उसे रोका और पूछा बैठा यह एक्सीडेंट हुआ कैसा तभी उसके जवाब सुनकर तो डॉक्टर भी हसने लग गए। उसने कहा चाचा वो कुछ ऐसा आया और में कुछ ऐसे भिड़ा देखा जाये तो Technically गलती उसकी थी पर Logically गलती मेरी थी। फिर किसी ने कुछ नहीं पूछा सब तो उसकी सलामती को लेकर ही खुश थे पर उसके ज़ेहन में अब भी वो १५-२० का अंतराल कही घूम रहा था। 

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