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Love Poem in Hindi

Love poem in Hindi, Kavita on Love
Love poem in Hindi

क्यों चोट लगती है
क्यों दिल रोता है
ख़ामोशी आँखों से
फिर आहे लेता है। 

क्यों उम्मीद लगाता है
क्यों प्यार करता है
नफरत की दीवारों से
फिर आहे लेता है। 

क्यों सपने देखता है
क्यों फरमाइश करता है
स्वार्थ के एहसास से
फिर आहे लेता है। 

प्यार हर रिश्ते से ऊपर है
प्यार हर स्वार्थ से ऊपर है
इसके लिए जाये तो जिंदिगी कम पढ जाये
यह एक बेशकीमती उपहार है। 
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