plus We Are Not Happy Why-हम खुश क्यों नहीं है ~ NR SECRET DIARY

We Are Not Happy Why-हम खुश क्यों नहीं है


कभी कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पे ले आती है जब हमारे पास सुख सुविधाओं के सारे संसाधन होते है फिर भी हम यह सोचने को मजबूर हो जाते है की हम खुश क्यों नहीं है !!!!
We Are Not Happy Why, Hindi Kahani
We Are Not Happy Why


जिंदगी ने अमित को सब विरासत में ही दे दिया था। शोहरत और रुतबा उसके आगे पानी भरते थे। पर उसकी जिंदगी और मशीन की जिंदगी में कोई ज्यादा फ़र्क़ नहीं था। आज अमित गूगल पे ढूंढ रहा था की कितने व्यक्ति दुनिया में वास्तव में खुश है। आज उसका मन बहुत उदास था। काम करने में मन नहीं लग रहा था। उसने देखा दुनिया में ७२ % व्यक्ति किसी न किसी कारण से खुश है पर उसे अफ़सोस  भी था क्यूंकि उन ७२ % में वो शामिल नहीं था। आज वो सुबह से चार कप चाय पि चूका था। उसने फिर चपरासी से चाय मंगाई। जैसे ही वो चाय का कप मेज पर रख कर जा रहा था तो उसने भोला कहकर आवाज लगाई। भोला ने हॅसते हुए पूछा जी साहब !! तब अमित ने भोला से पूछा ? भोला एक बात बताओ तुम्हारे इस चेहरे पे छायी हुई मुस्कराहट का क्या कारण है !! जितनी बार भी तुम मेरे केबिन में आते हो तुम्हारे चेहरे पे वो ही चमक रहती है कैसे ?? 
आज वक़्त ने मुझे सब दिया है नाम , शोहरत , रुतबा पर मेरे चेहरे पे यह मुस्कराहट नहीं है। मुझे तो यह भी मालूम नहीं है की कब आखरी बार में हँसा था।  क्या है तुम्हारे पास ऐसा मुझे भी दे दो। उचित दाम भी दे दुगा। 

तब भोला हस पड़ा। उसने कहा साहब ख़ुशी बिकने की चीज़ नहीं है जो आप खरीद सको। ख़ुशी एक महक की तरह है जो पुरे वातावरण को महका देती है। भले ही मेरे पास नाम और रुतबा नहीं है पर में खुश हु। जो मिला उसमे ही ख़ुशी ढूंढ़ लेता हु।  यही मेरी मुस्कराहट का कारण है। 

साहब आपको पता है हम घड़ियाल की तरह खुशियों को निगल रहे है। हम आगे बढ़ने की होड़ में कितने को पछाड़ रहे है। हमे पता है हमारे पास सब कुछ है हम फिर भी दुसरो की तरक्की से जल रहे है। कभी कभी तो हम अपने क्रोध में रिश्तो को भी छोड़ देते है।  हम दुसरो को बहुत कुछ सुनाते है पर खुदके अंदर झाकने का वक़्त ही नहीं होता हमारे पास। हम हुकम चलाते है पर प्यार से अपने छोटे बात करने से घबराते है। A .C  में घंटो बैठे रहते है पर खुली हवा में सांस लेने से कतराते है। बड़ी बड़ी बातें करते है पर किसी का सहारा भी नहीं बनते है। 

साहब खुश रहना है तो बंद दरवाजे और बंद खिड़किया खोल दो। रिश्तो को सम्मान दो , जीने का स्वाभिमान दो। सबको प्यार दो। सबकी मदद करो।  अहम को छोड़ दो। किसी का तिरस्कार मत करो। सबकी जुब्बा पे एक ही नाम हो अमित सर अमित सर !! ऐसा इंसान बनो। 

आज अमित ने अपने कार की सारी खिड़किया खोल दी और बारिश की बुँदे ख़ुशी से उस पर गिर रही थी। अब अमित उन ७२ % लोगो में था जो वास्तव में खुश थे। अब उसका सम्मान और बढ़ गया था और सारे कर्मचारी अमित सर अमित सर !! कहते हुए भी नहीं थकते थे। 
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