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Moral Story in Hindi- सूरज की समझ


Moral Story in Hindi, kahani
Moral Story in Hindi
कभी जिंदगी को मुस्कराते हुए देखा है या कभी आयने को मुस्कुराते हुए देखा है।  कभी एहसासो को मन की तरंगो से टकराते हुए देखा है। एक बार किसी की सच्चे दिल से मदद कर के देखो आयना अगर आपको देख कर  मुस्कुराये तो  कमेंट जरूर करना !!!!!!!!!!!!

 सूरज जिसने बचपन से ही मांसाहार का सेवन किया था उसका तो जन्म होने के बाद पहला निवाला भी यही था।  उसे उसी में रस आने लगा। वक़्त बीतता गया और आज वो ११ साल का हो गया।  मासूमियत के कटघरे में समझदारी झलकने लगी थी।  रोज़ की तरह शाम को उसके पिताजी आज फिर एक मुर्गी का बच्चा लेकर आये थे। जिसकी बलि चढ़ने में कुछ ही वक़्त बचा था।  तभी सूरज ने बालकनी में से किसी पक्षी की आवाज़ सुनी जो रुक ही नहीं रही थी। वो बालकनी की तरफ़ बढ़ा तो उसने पाया की एक मुर्गी कुक रही है पर उसके स्वर में उसे विलाप नज़र आ रहा था। वो फड़फड़ा रही थी। तड़प रही थी। तभी उसने देखा वो मुर्गी का बच्चा पिताजी के हाथ से निकलकर बालकनी तक आ गया था। और वो अपनी माँ क देख बहुत खुश हो गया था। अब वो अपनी माँ को पुकार रहा था और उसकी माँ उसके लिए तड़प रही थी। 

सूरज मात्र ११ वर्ष का बालक इंतमान से माँ बच्चे का स्नेह देख रहा था। उसके आँख भर आयी और वो  माँ को बच्चे से विलग होते हुए सहन न कर पाया और उसने उस पंछी को आज़ाद कर दिया। और जब वो बच्चा अपने माँ के आँचल से लिपट गया था मानों सृस्टि का सौंदर्य सब जगह बिखर गया था। और सूरज इस नज़ारे को अपनी आँखों के कैमरा में कैद कर ही रहा था तभी अंदर से पिताजी ने आवाज लगाई। 

सूरज सूरज !! जल्दी मुर्गी के बच्चे को लाओ। सूरज सहमा सा अंदर गया।  तब पिताजी ने पूछा बेटा!! मुर्गी का बच्चा बालकनी में क्यों छोड़ के आये उसे अंदर लेके आओ। अब बहुत तेज भूख लग रही है। तब सूरज ने कहा पिताजी वो तो फर से उड़ गया। तब पिताजी ने उसे फटकारा नालायक एक मुर्गी का बच्चा न संभलता कैसे कमा के खायेगा। पुरे ५०० रुपए दिए थे मुर्गी के और तुमने उसे ही जाने दिया। 

तब सूरज ने बड़े प्यार से पूछा?? पिताजी आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हु। 
पिताजी बोले नालयक और क्या बाकि रह गया अब पूछ ????
तब सूरज ने कहा पिताजी कल को अगर मुझे कोई मार के मेरे टुकड़े कर दे या मुझे कुछ हो जाये तो आप उसे चुपचाप स्वीकार कर लोगे या उसका प्रतिकार लोगे।  पिताजी बोले उसे तो में जमीन में गाड़ दुगा पर तुम्हारे ऊपर संकट के बादल तक नहीं आने दुगा पर तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो बेटा!!!!  

तब सूरज बोला पिताजी मुझे कुछ होने के डर से आप इतना परेशान हो गए हो तो पिताजी उस मुर्गी की माँ का क्या होता जो बालकनी के बाहर विलाप कर रही थी। तड़प रही थी अपने नन्हे से फूल के लिए पर उसका विलाप 
हमारे कानो को कहा सुनाई देता है।  वो हम इंसानो के आगे मजबूर है पर हम इतनी निर्दय क्यों है। में उसकी तड़प देख नहीं पाया और मैंने उसे छोड़ दिया। 

ठीक किया न मैंने पिताजी !!! पिताजी खड़े के खड़े रह गए।  आज मासूमियत के मुँह से समझदारी का ऐसा पाठ सुन दिल के बंद दरवाजे भी खुल गए थे। उन्होंने सूरज को गले से लगाया और कहा बेटा तुमने आज जो किया है वो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। पक्षियों को भी जीने का अधिकार है और हमे कोई हक़ नहीं है हम किसी मासूम परिंदे को उसकी माँ से अलग कर हमारा पेट भरे। फिर कभी उनके घर में कोई मुर्गी नहीं कटी पर आज कॉलोनी के सारे पंछी उनके छत पर बेख़ौफ़ होक घूम रहे है।   

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