plus Nari shakti kavita-नारी तू महान ~ NR SECRET DIARY

Nari shakti kavita-नारी तू महान


कितनी आसानी से कह दिया ना की तुम तो एक अबला नारी हो। तुमसे न होगा यह तुम तो अबला नारी हो। कितनी आसानी से तुमने नारी के अस्तित्व पर सवाल उठा दिया। कितनी आसानी से तुमने अपनी ही भाषा में नारी को परिभाषित कर दिया। कितनी आसानी से तुमने नारी को अपनी ही दुनिया में समेट लिया।  और कितनी आसानी से तुमने नारी को बेचारी बना दिया। 

Nari Shakti Kavita, Poem On Nari
Nari Shakti Kavita

कितना आसान सफर था और तुम खुद उसके चौकीदार थे। पर क्या तुमने नारी के मन तो टटोला है या कभी तुमने नारी को खुद के लिए जीते देखा है। क्या कभी तुमने नारी को अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए  देखा है या तुमने उस नारी को प्रसव की पीड़ा झेलते हुए देखा है। पर आज नारी अबला नहीं रही है। आज नारी किसी भी क्षेत्र में पिछड़ी नहीं है खुद बनी अपनी ढाल है आओ देखो नारी जगत का नया संसार है।



नारी मान है, सम्मान है, घर का स्वाभिमान है 
मत रोंदो उसे वह जगत का आधार है 
आज नहीं वो बेबस और लाचार है 
आज वो धारण कर चुकी दुर्गा का भी अवतार है। 

बेबसी की जंजीरो से छुड़ा लिया जिसने अपना दामन है 
खुले आसमान की छाव में दुनिया में आज उसका नाम है 
कल्पना चावला की बात करे या किरण बेदी को सलाम करे 
हर क्षेत्र में नारी ने बनायी आज अपनी अद्भूत पहचान है। 

ममता भरी जिसके आँचल में है 
त्याग करती जो हर बार है 
देवी का दर्जा मिला है 
नारी तू तो महान है। 

समर्पण जिसके स्वाभाव में है, अर्पण जिसके संस्कार है
हर रूप में ढल जाती , हर देह में निखर जाती  है 
वो है तो दुनिया है , दुनिया है तो हम है 
हमारा स्वाभिमान है वो, निर्मल विचारो की धारा है। 

सुई की नौक पे चलना हो 
या भिड़ना हो आज अंगारो से 
आज नहीं वो डरती किसी से 
खुद बनी अपना अभिमान है। 

आज नहीं जीती किसी के अहसान तले 
खुद ने रोशन किया अपना आशियाना है 
विरूद खड़ी आज वो  अत्याचारों से 
आज बनी वो प्रचंड ज्वाला है। 

एक नारी की यही कहानी है 
सागर में समाहित उसके गुणों की प्याली है 
दुनिया चलती आज उसके पदचिन्हों पर 
क्युकी उसकी महिमा तो अजब निराली है। 

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