plus LOve Story in Hindi-वो जाना पहचाना अजनबी ~ NR SECRET DIARY

LOve Story in Hindi-वो जाना पहचाना अजनबी





Love Story In Hindi, Kahani in Hindi
Love Story in Hindi
कभी कभी जिंदगी एक अन्जान सफर की तरह लगती है, अन्जान रास्तो के अन्जान मंजिल के अन्जान पथिक हम बन जाते है और हैरत की बात यह की हमारा सबसे करीबी भी हमे अजनबी की तरह लगता है....... 

आज की कहानी राधा नाम की युवती के इर्द गिर्द गुमती है रोज की तरह राधा आज सुबह भी जल्दी उठ गयी थी।  दो घुट चाय का पीकर अपने दैनिक कार्यो में व्यस्त हो गयी थी।  पर आज स्वभाव में बदलाव नजर आया था। सास ससुर को प्रणाम करना भूल गयी।  यहाँ तक की आज सब्जी में नमक डालना भी भूल गयी।  उसके पति भी नींद की रजाई छोड़कर नाश्ते के लिए आ गए थे।  पर आज राधा ने चुपचाप मेज पर दूध और टोस्ट रख कर अन्य कार्यो में व्यस्त हो गयी।  यद्यपि उसका दिल तो उसी मेज पर था पर वो कही और थी।  इतने में पति ने आवाज लगाई यह क्या ? इतना ठंडा दूध!! राधा मेज के पास आयी और राकेश से बड़े नरम स्वर में कहा पता नहीं कैसे आज !! लाओ गरम कर देती हु। पर राकेश को अब ऑफिस के लिए लेट हो रहा था वो बिना कुछ खाये पिए ही आज ऑफिस चल दिए।  और वो ठंडा दूध का गिलास राधा के हाथ में ही रह गया। 

राधा को कोई बात अंदर ही अंदर परेशांन कर रही थी।  वो वही मेज पर बैठ गयी। कल रात की बात उसके मानस  पटल पर बार बार अंकित हो रही  थी और वो सोच के अथाह सागर में डूब गए। आखिर क्या हुआ ऐसा कल रात को जो राधा को अंदर ही अंदर परेशां कर रहा था।  कल रात जब राधा ने राकेश से चाय बनाने को कहा तो राकेश हमेशा की तरह निरुतर हो गए। पर राधा के बार बार कहने पे वो किचन में गया । पर वो चाय की जगह काफी  लेकर आ गए।  क्यूंकि आज राधा दिन भर के कार्यो से पूरी तरह थक गयी थी इसलिए वो बुरी तरह राकेश पे झिझक गयी। एक ही पल में इतना प्यारा मोहाल ख़राब हो गया वो भी एक चाय के कप के लिए।  राकेश ने तो वो कॉफ़ी बेसिन में डाल दी फिर वो मोबाइल की दुनिया में खो गया। पर राधा को कहा नींद आती वो सोचती रही और आंसूं बहाती रही।  हम अपना कर्तव्य बखूभी निभाते है।  ससुर की चाय से लेकर सास के ताने भी सुनते है। बच्चों से पुरे दिन जुझते है। रात को पति के लिए भी सज सवर के रहते है। खुद के लिए हमारे पास वक़्त भी नही  होता है।  हमे इतना भी हक़ नहीं की कभी हम थक जाये तो हमारे भी कोई दो चार बात बिना सवाल किये कोई समझ ले। एक चाय ही तो बनानी थी उसमे इतने तेवर देखा दिए। पूरी रात सोचती रही पर उसे कोई जवाब नहीं मिला। 

फिर शाम को जब राकेश घर आये तो चुपचाप उसने खाना परोसा और सब कार्यो से निपट कर अपने दो साल के बच्चे को सुला बेड पे लेट गए। 
फिर कुछ देर बाद राकेश कमरे में आये आज उनके हाथ में दो कप चाय की थी जिसे बनाने में उसे बड़ा जोर आता था। पर आज तो बनानी ही थी।  रूठे को मनाना था। राधा मंद ही मंद मुस्कुरा रही थी। राकेश ने एक चाय का कप राधा की और बढ़ाया और कहा.. 

मेरी जिंदगी का हिस्सा हो तुम 
मेरी सबसे खूबसूरत कहानी हो तुम 
कभी न मेरे प्यार पे सवाल करना 
नफ़्ज़ मेरी धड़कन हो तुम। 

फिर क्या था राधा के चेहरे पे मुस्कान छा गए और उसके सवाल के जवाब 
उसे मिल गए। उसने राकेश से माफ़ी मांगी और दोनों ने चाय पी। फिर राकेश ने राधा को अपनी बाहों में कैद किया और दोनों प्यार के परिंदे  मोहब्बत के अन्जान रास्तो में जाना पहचाना अजनबी के साथ फिर खो गए। 
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