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Hindi Story- राहुल की वो जिद्द





 जिंदगी भी एक रंगमंच की तरह ही है जहा कोई हसता है कोई रोता है तो कोई करतब दिखाने से बाज नहीं आता। कोई ख़ुशी के सागर में डुबकिया लगा रहा होता है तो कोई गम के लहरों से हार मान बैठता है। 
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आज की कहानी शीला नामक युवती की ही जो तीस पार कर चुकी है। वो निराशा को गले लगाकर बैठी है। न किसी से बोलती है, न हसती है, चुप्पी धारण कर बैठी है। सूर्य की किरण नित्य की भांति अपना प्रकाश फैला चुकी थी और हलकी हलकी रौशनी से जीवन को प्रस्फुटित कर रही थी।  ऐसा लग रहा था मानों सूर्य आज खिलकर हस रहा है और ख़ुशी के नग्मे चारो और बिखेर रहा है। 

राहुल शीला का सात साल का बच्चा था। आज वो जल्दी उठ गया था।  क्यूंकि आज अतीतवार था और पापा का भी अवकाश था। पर आज उसने जिद्द पकड़ ली थी। वो सीधा माँ के पास गया और बड़े प्यार से पूछा मां आप मुझे आज मेला ले जाओगे न। हमेशा की तरह माँ को निरुत्तर देख कर वो अब पिताजी के पास गया और फिर वही सवाल किया पिताजी आप मुझे मेला ले जाओगे न। राहुल ने फिर कहा पिताजी पता नहीं माँ को क्या हो गया वो मुझे कही बाहर  नहीं ले जाती। पता है पिताजी कल ही मेरे दोस्त को उसकी माँ और पिताजी मेला लेकर गए और उसने बताया वहा बहुत से झूले है, बहुत सारे खिलोने है। उसने कहा पिताजी  मुझे ले जाओ न। पिताजी आप मुझे ले जाओ न !! संजय  ने कहा ठीक है बेटा आज हम मेला जरूर जायेगे। 

संजय सीधा शीला के पास गया और कहा शीला चलते है राहुल की बहुत इच्छा है, राहुल की ख़ुशी के लिए ही चल जाओ।  शीला ने पहले तो मना कर दिया पर राहुल की जिद के आगे खुद को रोक न पायी  और चलने के लिए राजी हो गयी। 

फिर संजय का स्कूटर वहा रुका जहा मेला  लगा हुआ था। मेला   रंग बिरंगी वस्तुओ से सजा हुआ था। वहा की हर दुकान लोगो का आकर्षण का  केंद्र बनी हुई थी। कही आइसक्रीम के ठेले तो कही खिलोने की भरमार थी। कही झूले पे झूलते बच्चे तो कही करतब दिखा रही मोम की गुड़िया थी। इस बीच में शीला आज इतने वक़्त बाद खुलकर हस पायी थी। मैले को देख उसका मन आनंदित हो गया था और कुछ वक़्तबाद  आज वो माँ के खोने के एहसास को भूल खुले आसमान में सांस ले रही थी। वो कभी राहुल को मचलते हुए देखती तो कभी संजय को उसको सँभालते हुए देखती। 

आज उसे एहसास हुआ की उसकी भी अपनी एक दुनिया है और वो खुद उसकी मलिका है।  पर उसे वो कब से नजरअंदाज कर रही है और वो उसके लौटने का बेसर्बी से इंतज़ार कर रही है। उसने अब राहुल को प्यार भरी नजरो से देखा और संजय का हाथ थाम लिया।  आज जिंदगी गम भरे साये से निकलकर रौशनी की प्रस्फुटित किरणे को देख फिर से मुस्कुराने लगी।  


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