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Hindi Article on love- क्या है प्यार ???



क्या है प्यार ???



Hindi Article on love, Hindi Essay on Love
Hindi Article on love



क्या प्यार समर्पण का नाम है , क्या प्यार रिश्तो का नाम है, क्या प्यार कर्तव्य का नाम है , क्या प्यार हमेशा चुप रहने का नाम है , क्या प्यार आवारगी है , क्या प्यार पागलपन है , क्या प्यार शादी से पहले जुड़ते नायज़ाज रिश्तो का नाम है , क्या प्यार छलावा है , क्या प्यार नयी नयी शादी के बाद बन्द कमरों की दीवारों में होता उसका नाम है प्यार , क्या प्यार बुढ़ापे की लाठी पकडे बाबूजी की देखभाल  करना उसका नाम है प्यार, क्या प्यार भगवान को तन मन से स्मरण  करना उसका नाम है प्यार।
क्या है प्यार ?????

प्यार तो एक नायब तस्वीर है , प्यार जीने का सम्मान है , स्वाभिमान है। प्यार दिल से बंधी एक डोर है।  प्यार एक खूबसूरत रिश्ते का नाम है।  प्यार सिर्फ ख़ुशी नहीं गम बाटने का नाम है।  प्यार वो है जो आँखों के छिपे आंसूं को भी देख ले वो है प्यार। प्यार हर वक़्त महसूस करने वाला एक एहसास है।  प्यार हमराज़ है हमसफ़र है।
प्यार रास्ता है मंज़िल का
प्यार इनायत है
प्यार जज़्बात है                                                                      
प्यार दर्पण है
प्यार जीने क तमन्ना है
प्यार आरज़ू है
प्यार ख़ुशी है
प्यार कागज़ की कश्ती है
प्यार है तो जिंदगी है।

रिश्तो की खूबसूरती प्यार से होती है , रिश्तो की रौनक प्यार से होती है।  फिर वो कोई भी रिश्ता क्यों नही हो।  माता पुत्र का हो , भाई बहिन का हो , पति पत्नी का हो। फिर आज रिश्तो में दरकरार क्यों होती है।  क्यों सिमट जाती जिन्दगी खुद के दायरे में ? क्यों हर वक़्त कुक्कट करता सवेरा है।  जरा सोचो , दिल का दर्पण उठा के देखो क्या प्यार , क्या रिश्ते हमारे अहंकार , हमारा घमंड और हमारी इछाओ के दायरे से बहार तो नहीं जा रहे।  क्या हमारी आवाज़ हमारा स्वार्थ किसे के दिल को दुखा तो नही रहा है।  क्या हमारा प्यार हमारी इछाओ के वशीभूत है या हमारी जरूरूत का साथी है। 

जिंदगी रंगमंच है जहा हम अपना किरदार बखूभी निभाते है और हम अपना कर्तव्य भलीभांति वहन भी करते है पर प्यार तो इंसान की जरुरत के ज्यादा कुछ भी नहीं है , रिश्ते तो बस नाम के है।  जब इंसान की जरुरत पूरी नहीं होती तो वो प्यार पे भी खीझ उठता है।  प्यारा सा संसार सजाते है , बहुत प्यारा लगता है पर हक़ीक़त प्यारा सा संसार कुछ वक़्त के लिए प्यारा होता है  वो सिर्फ जिम्मेदारी, कर्तव्य का मरीज़ होता है।

क्यों चोट लगती है
क्यों दिल रोता है
ख़ामोशी आँखों से
फिर आहे लेता है।

क्यों उम्मीद लगाता है
क्यों प्यार करता है
नफरत की दीवारों से
फिर आहे लेता है।

क्यों सपने देखता है
क्यों फरमाइश करता है
स्वार्थ के एहसास से
फिर आहे लेता है।

प्यार हर रिश्ते से ऊपर है
प्यार हर स्वार्थ से ऊपर है
इसके लिए जिया जाये तो जिंदगी कम पड़ जाये
यह एक बेशकीमती उपहार है।

लेखिका
रिंकल 
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